महानिदेशक, डॉ. सुलभा रानडे का संदेश

Radar

अपने संस्थान की वेबसाइट पर आपको स्वागत करते हुए मुझे अति प्रसन्नता हो रही है। वर्ष 1984 में स्थापित, समीर विगत तीन दशकों में सूक्ष्मतरंग अनुसंधान एवं विकास का एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। समीर सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं अन्य उपयोगकर्ता एजेन्सियों के लिए विभिन्न प्रकार की प्रणालियों एवं उप प्रणालियों के अनुसंधान एवं विकास में संलग्न है।

वर्ष 1990 में कैंसर चिकित्सा के लिए मेडिकल लिनाक का स्वदेशी विकास एवं डिज़ाइन, वायुमंडलीय अध्ययन हेतु 1994 में तिरुपति के निकट गडनकी में मध्य मंडल,समताप मंडल, क्षोभ मंडल (एमएसटी) राडार (विश्व में दूसरा सबसे बड़ा राडार ) का विकास और कार्यशील करना हमारी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ रहीं है। इन से समीर आर एफ एवं सूक्ष्म तरंग और इसके सम्बद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियाँ करने का एक प्रमुख संस्थान बन गया है।  समीर ने रणनीतिक अनुप्रयोग के लिए सफलता पूर्वक कई प्रणालियाँ एवं उप प्रणालियाँ विकसित की है।

विशेषज्ञता के हमारे मूल क्षेत्र में रैखिक त्वरक, आरएफ/ सूक्ष्मतरंग तथा मिलिमीटर तरंग प्रौद्योगिकी, वायुमंडलीय राडार और राडार आधारित यंत्रीकरण, संचार, ऐन्टिना, फोटोनिक्स, ईएमआई/ईएमसी इत्यादि शामिल हैं। प्रबल अन्तरविषय शाखा के कौशल के साथ समीर की समर्पित एवं सक्षम टीम है जो उच्चत्तर ऊचाइयों की प्राप्ति के लिए हमारे सहयोगियों के साथ भागीदार हो सकते हैं।

संबंधित क्षेत्र में मूल एवं प्रायोजित परियोजनाओं को निष्पादित कर प्राप्त की गई विशेषज्ञता और ज्ञान को सतत संवर्धन किया जाता है। समीर अपने मूल अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के माध्यम से इन-हाउस टेकनोल़ॉजी पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखा है और वैश्विक परिदृश्य में प्रौद्योगिकी से तालमेल बैठाए रहता है। ज्ञान क्षेत्र में प्राप्त विशेषज्ञता का उपयोग राष्ट्र की सम्पत्ति के सृजन हेतु परिजनाओं को लेकर किया जाता है। स्वदेशी प्रौद्योगिकी की स्थापना से हमारे राष्ट्रीय विकास और संवृद्धि में भारत सरकार की पहल मेक इन इंडिया में समीर की भूमिका का भविष्य मैं देख सकती हूँ।        

मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में अपने विद्यमान केंद्रों के अतिरिक्त विजाग में विद्युत-चुम्बकीय पर्यावरणीय प्रभाव (ई-3) की स्थापना और भा.प्रौ.सं. गुवाहाटी, असम में उच्च शक्ति सूक्ष्मतरंग नलिका एवं घटक प्रौद्योगिकी की स्थापना कर संस्थान अपनी क्षमता निर्मांण में व्यापक विस्तार करने की दहलीज़ पर है। संस्थान अनुसंधान एवं विकास में विभिन्न मंत्रालयों और अन्य एजेन्सियों से भी सहयोग कर रहा है।

मेडिकल इजोटॉप (Tc99) उत्पादन हेतु उच्च ऊर्जा रैखिक त्वरक की वर्तमान पहल,  चुम्बकीय अनुनाद इमेजिंग की स्वदेशी प्रौद्योगिक के विकास और भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अन्तर्गत समीर के द्वारा ली गई भारतीय नक्षत्रों के साथ राष्ट्रीय नेविगेशन की पहल के साथ ही, समीर अपनी पहुँच और सुपूर्दगी में लम्बी छलांग लगाने के लिए तैयार है।  

5जी टेस्ट बेड की स्थापना हेतु जिससे घरेलु मोबाइल टेलिफोनी की नवीनतम पीढ़ी के अनुसंधान प्रयोग करने में कम्पनियाँ सक्षम होंगी,भा.प्रौ.सं. मद्रास, भा.प्रौ.सं.मुबई, भा.प्रौ.सं. दिल्ली, भा.प्रौ.सं. हैदराबाद, भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर, बेतार प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र,आईआईटी मद्रास और समीर को शामिल करते हुए एक बहुत ही संस्थानिक पहल भारत सरकार के द्वारा स्वीकृत हुई है।

मैं इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी (MeitY) मंत्रालय को उनकी तकनीकी, वित्तीय, एवं प्रशासनिक सहायता के लिए धन्यवाद देती हूँ, जिसके बिना समीर को एक प्रमुख संस्थान बनना संभव नहीं था।

स्वदेशी प्रौद्योगिकी के विकास के लक्ष्य और विज़न की प्राप्ति के लिए अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय संगठनों से सहयोग की आशा करती हूँ।

डॉ. सुलभा रानडे, महानिदेशक