(मूलभूत अनुसंधान एवं विकास पहल)

Radar पिछले तीन दशकों से समीर ने स्वदेशी रडार आधारित वायुमंडलीय उपकरण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमने सर्वप्रथम तिरुपति के निकट गडांकी में प्रतिष्ठित एमएसटी रडार बनाया जो 100 किमी तक पवन प्रोफाइलें देता है। हमने पवन/तापमान प्रोफाइलर के लिए एक 400 MHz रेडियो ध्वनिक साउंडिग प्रणाली (RASS) विकसित की है जो आईएमडी परिसर, पाषण, पुणे में स्थापित है। वायुमंडल की ध्वनिक साउंडिंग की तकनीक जो चरणबद्ध सरणी डॉप्लर सोडार/मीनी पोर्टेबल सोडार जैसे उपकरणों के विकास का कारण बना है, हमारे द्वारा विकसित की गई है। इन उपकरणों को वायुमंडलीय अनुसंधान और पर्यावरण निगरानी के लिए कई स्थानों पर उपयोग में लाया जा रहा है। हमने डिजिटल रेडियोसोंडे, ओजोनसोंडे भी विकसित किया है जिसके बैच उत्पादन के लिए प्रौद्योगिकी आईएमडी में स्थानांतरित की जा रही है। इसके अतिरिक्त समीर (SAMEER) ने आईएमडी द्वारा वित्तपोषित 1680 MHz रेडियोथिओडोलाइट के विकास और 400 MHz रेडियोथिओडोलाइट के स्वचालन/ ऑटोकंप्यूटेशन का काम पूरा कर लिया है। ये विकसित प्रौद्योगिकियां मौसम विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के लिए सीधे तौर पर उपयोगी हैं। एक मूलभूत अनुसंधान गतिविधि के रूप में हम Ka बैंड क्लाउड रडार के विकास कार्य में जुटे हैं।
  • चरणबद्ध सरणी सोडार

    रिमोट संचालन सुविधा के साथ पर्यावरणीय आकलन के लिए एक चरणबद्ध सारणी सोडार विकसित किया गया है। यह प्रणाली पर्यावरणीय आकलन अध्ययनों को विशेष महत्व देते हुए विकसित की गई है। डेटा फ़ील्ड में एम्बेडेड नियंत्रण इकाई में संग्रहित है जिसे वाई-फाई/ इथरनेट सक्षम कंप्यूटर/लैपटॉप पर डाउनलोड किया जा सकता है। गतिविधियों को रिमोट विधि से भी नियंत्रित किया जा सकता है।

  • Ka-Band पोलरीमेट्रिक क्लाउड रडार

    Radar Ka-Band पोलरीमेट्रिक क्लाउड रडार हाइड्रोमेटियोरों के संबंध में माइक्रो फिजिकल सूचना के बारे में बेहतर जानकारी उपलब्ध करता है। हाइड्रोमेटियोरों के वर्गीकरण के लिए सॉफ्टवेयर मॉडल विकसित किया गया है। यह मॉडल अपने इनपुट के रूप में Z, Zdr, Ldr, Kdp जैसे पोलरीमेट्रिक रडारों से विभिन्न पैरामीटरों को लेता है, जिन से फजी लॉजिक मॉडल का उपयोग करके हाइड्रोमेटियोरों में अंतर किया जा सकता है। एल्गोरिदम MATLAB में लिखा गया है और कृत्रिम डेटा का उपयोग करके परीक्षित किया गया है।

समीर (SAMEER) अपने मूलभूत अनुसंधान एवं विकास पहलों के माध्यम से KA बैंड रडार विकसित कर रहा है।

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